उर्दू शायरी · ग़ज़ल

qarib kuchh na mila dur se dhuan dekha

क़रीब कुछ न मिला दूर से धुआँ देखा

قریب کچھ نہ ملا دور سے دھواں دیکھا

शायर: Aal-e-Raza Raza7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क़रीब कुछ न मिला दूर से धुआँ देखा
क़फ़स से छूट के क्या ख़ूब आशियाँ देखा

यही है सैर फ़क़ीरों की और यही फ़रियाद
ज़मीं पे बैठ गए सू-ए-आसमाँ देखा

हुए तमाम जो सज्दे थे दूर के आदाब
यहाँ से और है आलम कि आस्ताँ देखा

हिसार खींच के अपने ही दिल का बैठ रहे
ज़माने-भर को मोहब्बत से बद-गुमाँ देखा

चमन चमन तिरी सैरें नज़र बहार बहार
चटक चटक पड़े ग़ुंचे जहाँ जहाँ देखा

हरीम-ए-नाज़ पे वो रंग-ओ-नूर की बारिश
हरीम-ए-नाज़ में क्या था ये फिर कहाँ देखा

'रज़ा' ने दिल को सजा कर तिरे तसव्वुर से
जहान-ए-हुस्न में इक हुस्न-ए-दो-जहाँ देखा