उर्दू शायरी · ग़ज़ल

qaid-e-roz-o-shab se chhuTe so gae

क़ैद-ए-रोज़-ओ-शब से छूटे सो गए

قید روز و شب سے چھوٹے سو گئے

शायर: Vikas Sharma Raaz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क़ैद-ए-रोज़-ओ-शब से छूटे सो गए
आज हम भी ख़ाक ओढ़े सो गए

कुछ न जब ता'मीर हम से हो सका
ख़ुद को हम मिस्मार कर के सो गए

अब नहीं हैं ख़्वाहिशों के चहचहे
दिल-शजर के सब परिंदे सो गए

जागते रहने का डर भी ख़ूब है
जागते रहने के डर से सो गए

और फिर हम पर खुले अस्रार-ए-शब
जो खड़े थे हम से आगे सो गए