उर्दू शायरी · ग़ज़ल

qafila jab ruka hua hoga

क़ाफ़िला जब रुका हुआ होगा

قافلہ جب رکا ہوا ہوگا

शायर: Umar Farhat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क़ाफ़िला जब रुका हुआ होगा
सारा मंज़र थका हुआ होगा

बादलों पर कहीं बुलंदी पर
ख़्वाब का घर बना हुआ होगा

ये जो हर सम्त ख़ून फैला है
ख़्वाब में हादिसा हुआ होगा

बादशाही जिसे मिली होगी
तेरे दर पर झुका हुआ होगा

जाने वाला गली की नुक्कड़ पर
मुड़ते मुड़ते रुका हुआ होगा

दिल में मौजूद वो अगर नहीं है
धड़कनों में छुपा हुआ होगा