उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pyase ko pani barsana paDta hai

प्यासे को पानी बरसाना पड़ता है

پیاسے کو پانی برسانا پڑتا ہے

शायर: Vikram6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

प्यासे को पानी बरसाना पड़ता है
सागर को बादल बन जाना पड़ता है

जिन के पास न हो मरने की ख़ातिर कुछ
उन को जीते जी मर जाना पड़ता है

दुनिया में दर यूँही नहीं खुलते प्यारे
दीवारों से सर टकराना पड़ता है

नद्दी से जितना चाहे लड़ ले पत्थर
मिट्टी बन उस को बह जाना पड़ता है

एक जुनूँ का पेड़ सींचने की ख़ातिर
कुछ ख़्वाबों का ख़ून बहाना पड़ता है

बुनियादें मज़बूत यूँ भी हो जाती हैं
उन को घर का बोझ उठाना पड़ता है