उर्दू शायरी · ग़ज़ल

purana hun mujhe chhoDo naya sathi mubarak ho

पुराना हूँ मुझे छोड़ो नया साथी मुबारक हो

پرانا ہوں مجھے چھوڑو نیا ساتھی مبارک ہو

शायर: Faisal Shahzad6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पुराना हूँ मुझे छोड़ो नया साथी मुबारक हो
यही बस तुम से कहना है तुम्हें शादी मुबारक हो

तिरे हाथों पे ये रंग-ए-हिना मेरा लहू होगा
मगर मेरी तरफ़ से भी तुम्हें मेहंदी मुबारक हो

दु'आ-गो हूँ हमेशा के लिए क़ाएम रहे रिश्ता
सदा बसते रहो दोनों कि ये जोड़ी मुबारक हो

तुम्हारे तन पे हर इक रंग का मल्बूस सजता है
तुम्हारा पैरहन लहँगा हो या साड़ी मुबारक हो

तुम्हारा घर हमेशा के लिए आबाद हो तुझ से
नई कोठी नया बंगला नई गाड़ी मुबारक हो

वो शहज़ादा था लेकिन तुम फ़क़त शहज़ाद थे 'फ़ैसल'
सो उस ख़ुश-बख़्त शहज़ादे को शहज़ादी मुबारक हो