उर्दू शायरी · ग़ज़ल

phulon jaisa jism hai us ka nazuk nazuk hath

फूलों जैसा जिस्म है उस का नाज़ुक नाज़ुक हाथ

پھولوں جیسا جسم ہے اس کا نازک نازک ہاتھ (ردیف .. ت)

शायर: Nadeem Malik5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फूलों जैसा जिस्म है उस का नाज़ुक नाज़ुक हाथ
देख के उस को कैसे रहेंगे क़ाबू में जज़्बात

जिस ने हम को छोड़ दिया था तन्हा कर के दोस्त
वक़्त मिला तो हम भी उस से पूछेंगे हालात

ऐसा नईं है उस का मुझ पर रो'ब चले हर वक़्त
काट भी सकता हूँ मैं उस की अच्छी-ख़ासी बात

अक्सर ऐसा हो जाता है हम दोनों के बीच
मैं क़िर्तास पे रख देता हूँ आँखें और वो हाथ

दुश्मन भी वो दोस्त बने हैं मेरे दोस्त 'नदीम'
जिस दिन निकलूँगा मैं घर से लग जाएगी घात