उर्दू शायरी · ग़ज़ल

phul ke sath yun milae phul

फूल के साथ यूँ मिलाए फूल

پھول کے ساتھ یوں ملائے پھول

शायर: Maham Haya Safdar13 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फूल के साथ यूँ मिलाए फूल
फूल लाए हैं हम बराए फूल

उस की नरमी का क्या बयाँ करिए
वो जो खाने में सिर्फ़ खाए फूल

मन का आँगन हुआ मो'अत्तर तब
उस ने हँस हँस के जब खिलाए फूल

उन को देखा तो ख़ुश हुई तितली
उन को देखा तो मुस्कुराए फूल

उन से बनती है सारे गुलशन की
मान लेते हैं उन की राय फूल

याद आया वो शबनमी चेहरा
फूल वाले ने जब दिखाए फूल

आप के होंट थे तसव्वुर में
हम ने काग़ज़ पे जब बनाए फूल

कौन रखता है अपने गुल-दाँ में
ऐ मिरे हम-नफ़स पराए फूल

आप जाएँगे जान से अपनी
हम ने बालों में गर सजाए फूल

थी ज़मिस्तानी चाल मौसम की
रात भर ओस में नहाए फूल

जाग उट्ठी हमारी महरूमी
जब किसी के लिए भी आए फूल

हम ने तकिया नहीं किया उस पर
ख़ुद ही जा कर ख़रीद लाए फूल

ऐ ख़ुदा मेरी ख़ैर है लेकिन
वो सदा महके और पाए फूल