उर्दू शायरी · ग़ज़ल

phir wahi shab wahi sitara hai

फिर वही शब वही सितारा है

پھر وہی شب وہی ستارہ ہے

शायर: Vikas Sharma Raaz4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फिर वही शब वही सितारा है
फिर वही आसमाँ हमारा है

वो जो ता'मीर थी तुम्हारी थी
ये जो मलबा है सब हमारा है

वो जज़ीरा ही कुछ कुशादा था
हम ने समझा यही किनारा है

चाहता है कि कहकशाँ में रहे
मेरे अंदर जो इक सितारा है