उर्दू शायरी · ग़ज़ल

phir se mumkin ho to rishton ko sanwara jae

फिर से मुमकिन हो तो रिश्तों को सँवारा जाए

پھر سے ممکن ہو تو رشتوں کو سنوارا جائے

शायर: Yasmeen Moomal6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फिर से मुमकिन हो तो रिश्तों को सँवारा जाए
'इश्क़ को दिल से कभी यूँ न उतारा जाए

सख़्तियों से ये बग़ावत पे उतर आते हैं
नर्म लहजे से ही बच्चों को सुधारा जाए

'इश्क़ का खेल अगर खेल रहे हो दिल से
जीत जाने के लिए फिर इसे हारा जाए

जिस से हासिल करें 'इबरत ये ज़माने वाले
इस तरह का भी कोई वक़्त गुज़ारा जाए

हुस्न-ओ-किरदार की ख़ुशबू से मो'अत्तर हो कर
मुल्क और क़ौम को मिल-जुल के सँवारा जाए

'यासमीं' सब की ही सुनता है मिरा रब्ब-ए-करीम
शर्त ये है कि उसे दिल से पुकारा जाए