उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo chehre chamakte the wo murjhae hue hain

जो चेहरे चमकते थे वो मुरझाए हुए हैं

جو چہرے چمکتے تھے وہ مرجھائے ہوئے ہیں

शायर: Yasmeen Moomal5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो चेहरे चमकते थे वो मुरझाए हुए हैं
लगता है बहारों के ये ठुकराए हुए हैं

जब झूटों के चेहरे से हटाया गया पर्दा
सच सामने आया तो वो झुँझलाए हुए हैं

मुझ पर जो किया करते थे इल्ज़ाम-तराशी
इख़्लास से अब मेरे वो शरमाए हुए हैं

इंसान के बस में नहीं सीधा उन्हें करना
वो लोग जो पैदाइशी बल खाए हुए हैं

ये बात अलग है मिरे घर तक नहीं आए
ख़्वाबों में कई बार तो वो आए हुए हैं