उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aa rahe hain raste par aa rahe hain

आ रहे हैं रास्ते पर आ रहे हैं

آ رہے ہیں راستے پر آ رہے ہیں

शायर: Yasmeen Moomal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आ रहे हैं रास्ते पर आ रहे हैं
वो जिन्हें बरसों से हम समझा रहे हैं

हैं बहुत उलझे हुए उल्फ़त के रस्ते
रफ़्ता रफ़्ता हम इन्हें सुलझा रहे हैं

वो हमीं पर फेंकने लगते हैं पत्थर
आइना जिन को भी हम दिखला रहे हैं

कुछ पुरानी हसरतों की लाश है ये
हम जिसे काँधे पे ले कर जा रहे हैं

ले रही है ज़िंदगी करवट पे करवट
थपकियाँ दे कर इसे बहला रहे हैं

आब-ए-उल्फ़त से कोई सैराब कर दे
ख़्वाब आँखों के मिरे मुरझा रहे हैं

'यासमीं' बे-साख़्ता उन से ये कह दो
आप ही बस मेरे दिल को भा रहे हैं