उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bataun kaise tumhein kaisi yar guzri hai

बताऊँ कैसे तुम्हें कैसी यार गुज़री है

بتاؤں کیسے تمہیں کیسی یار گزری ہے

शायर: Yasmeen Moomal6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बताऊँ कैसे तुम्हें कैसी यार गुज़री है
तुम्हारी बात मुझे नागवार गुज़री है

तुम्हारा प्यार था जब तक नसीब में मेरे
हर एक रात बहुत यादगार गुज़री है

मज़ाक़ अपने बुज़ुर्गों का जो उड़ाते थे
हयात उन की बहुत शर्मसार गुज़री है

कभी सुकून का लम्हा नसीब ही न हुआ
हयात सारी बहुत बे-क़रार गुज़री है

ये लग रहा है मुझे देख कर लब-ओ-रुख़्सार
इन्हीं को छू के यहाँ से बहार गुज़री है

तुम्हारे जिस्म से मस हो के आई हो जैसे
अभी यहाँ से जो ‘मोमल’ बयार गुज़री है