उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is ada se hath apne mal rahi hai zindagi

इस अदा से हाथ अपने मल रही है ज़िंदगी

اس ادا سے ہاتھ اپنے مل رہی ہے زندگی

शायर: Yasmeen Moomal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस अदा से हाथ अपने मल रही है ज़िंदगी
ख़ौफ़ की परछाइयों में पल रही है ज़िंदगी

घर के आँगन में खिंची दीवार ये कहती रही
भीड़ में रिश्तों की तन्हा चल रही है ज़िंदगी

आइना ऐसा दिखाया है 'अदावत ने हमें
बे-सबब बुग़्ज़-ओ-हसद में ढल रही है ज़िंदगी

चश्म-ए-नम से आँसुओं का एक दरिया है रवाँ
महव-ए-हैरत हूँ कि फिर भी जल रही है ज़िंदगी

वक़्त ने नज़रों के आगे क्या तमाशा रख दिया
देख कर जिस को सदा बेकल रही है ज़िंदगी

सोच कर बचपन हमेशा दिल में आता है ख़याल
आज भी वैसी हो जैसी कल रही है ज़िंदगी

ज़िंदगी को लम्हा लम्हा जी रही है 'यासमीं'
और उस को लम्हा लम्हा छल रही है ज़िंदगी