उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kya ‘ilaj-e-gham ka bhi usko hunar aata nahin

क्या ‘इलाज-ए-ग़म का भी उस को हुनर आता नहीं

کیا علاج غم کا بھی اس کو ہنر آتا نہیں

शायर: Yasmeen Moomal9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्या ‘इलाज-ए-ग़म का भी उस को हुनर आता नहीं
चारागर मेरी तरफ़ क्यों भूल कर आता नहीं

रास्ता दुश्वार है काँटों-भरा भी है मगर
'इश्क़ की राहों में फूलों का सफ़र आता नहीं

प्यार का इज़हार कर दो सामने है जान-ए-मन
ऐसा भी होता है ये पल 'उम्र भर आता नहीं

जो बुराई के मुक़ाबिल आ गए मैदान में
सोच कर अंजाम उन के दिल में डर आता नहीं

देख कर तस्वीर दिल बहला रहे हैं वालदैन
लौट कर परदेस से नूर-ए-नज़र आता नहीं

बंद कर डाला गुनाहों ने मिरी रहमत का बाब
इस लिए मेरी दु'आओं में असर आता नहीं

कट रही है 'उम्र अपनी रात-भर जगते हुए
इस तरफ़ लेकिन कोई ले कर सहर आता नहीं

वक़्त-ए-मुश्किल में हमेशा सब्र से ही काम लो
वक़्त से पहले तो पेड़ों पर समर आता नहीं

छोड़ कर तुम साथ मेरा दूर इतना हो गए
'यासमीं' साया भी अब मुझ को नज़र आता नहीं