उर्दू शायरी · ग़ज़ल

phenki hai fath-yab ne dastar khinch kar

फेंकी है फ़त्ह-याब ने दस्तार खींच कर

پھینکی ہے فتح یاب نے دستار کھینچ کر

शायर: Om Awasthi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फेंकी है फ़त्ह-याब ने दस्तार खींच कर
पहले ये काम होता था तलवार खींच कर

अज्दाद से सुना था उधर अपने लोग हैं
इक रोज़ चाह ले गई उस पार खींच कर

तक़दीर मेरी मन के मुताबिक़ नहीं हुई
देखी है इक लकीर कई बार खींच कर

याद आएगा तुम्हें ये सफ़र में कई जगह
आँखों में तुम समेट लो घर-बार खींच कर