उर्दू शायरी · ग़ज़ल

payam dasht ke parwardigar lae hain

पयाम दश्त के परवरदिगार लाए हैं

پیام دشت کے پروردگار لائے ہیں

शायर: Oan Raza6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पयाम दश्त के परवरदिगार लाए हैं
सुनो असीर-ए-ख़िज़ाँ हम बहार लाए हैं

कहो तो रख़्त-ए-सफ़र और मुख़्तसर कर लें
जो क़ाफ़िले में बदन का ग़ुबार लाए हैं

हर एक दिल में दर आई फ़राज़ की ख़्वाहिश
ये ख़्वाब जब से मुझे सू-ए-दार लाए हैं

ख़ुदा है मद्द-ए-मुक़ाबिल सो एहतिजाजन लोग
घरों से अब तिरी तस्वीर उतार लाए हैं

जहाँ नज़र में तिरा ग़म भी मो'तबर न रहा
मुझे वहाँ भी जुनूँ के हिसार लाए हैं

उसे कहो न करे मुस्तरद ख़याल-ए-विसाल
कि हम क़ज़ा से ये लम्हे उधार लाए हैं