उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aankh mein tere tasawwur se nami len kuchh aur

आँख में तेरे तसव्वुर से नमी लें कुछ और

آنکھ میں تیرے تصور سے نمی لیں کچھ اور

शायर: Oan Raza6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आँख में तेरे तसव्वुर से नमी लें कुछ और
फिर कोई हश्र उठा जी में कि जी लें कुछ और

दस्त-ए-इम्काँ मिरे शाने पे रखा रह जाए
सर करूँ मैं तिरी ज़ुल्फ़ों की फ़सीलें कुछ और

झील तो मेरी भी पलकों पे उतर सकती है
तुम करो पेश मोहब्बत की दलीलें कुछ और

बुझ गए ज़हर में सय्याद के जलते पैकान
खुल गईं मुझ पे रि'आयत की सबीलें कुछ और

आँख को चाहिए मंज़र कोई अपने जैसा
ख़ुश्क हो जाएँ ये ख़ामोश सी झीलें कुछ और

इस से पहले कि सराबों के सफ़र पर निकलें
ऐ चमन होंट तिरी ओस ही पी लें कुछ और