उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo aks bhi dekhoge wo surat hai hamari

जो 'अक्स भी देखोगे वो सूरत है हमारी

جو عکس بھی دیکھو گے وہ صورت ہے ہماری

शायर: Oan Raza6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो 'अक्स भी देखोगे वो सूरत है हमारी
आईने बदलती हुई वहशत है हमारी

कस लेते हैं हर कोस पे सामान की गिरहें
उस याद सिवा कौन सी दौलत है हमारी

है नक़्श-ए-कफ़-ए-पा में कई चश्मों का अफ़्सूँ
बे-अब्र ज़मीनों को सुहूलत है हमारी

जो सब्ज़ रुतों ने तिरे लहजे से चुराए
बरसों उन्हीं गीतों पे रियाज़त है हमारी

मख़्सूस न रख बहर-ए-ख़ुदा वस्ल के लम्हे
तुझ फ़र्ज़ से पहले तो 'अक़ीदत है हमारी

साँपों से घिरा रहता है ख़्वाबों का ख़ज़ीना
किस नींद में खोई हुई क़िस्मत है हमारी