उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dekhte dekhte tadbir badal deta hai

देखते देखते तदबीर बदल देता है

دیکھتے دیکھتے تدبیر بدل دیتا ہے

शायर: Oan Raza8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

देखते देखते तदबीर बदल देता है
जंग का फ़ैसला इक तीर बदल देता है

सिर्फ़ इतनी है रि'आयत हमें दारोग़ा की
ज़ंग लग जाए तो ज़ंजीर बदल देता है

एक पत्थर के ख़ुदा ने ये बताया है मुझे
कोई तेशा है जो तक़दीर बदल देता है

तपते सहरा को बना लेता है ऐवाँ अपना
'इश्क़ इंसान की जागीर बदल देता है

यूँ उलझता है तिरी याद का नक़्शा ऐ दोस्त
देख यकसर मिरी ता'मीर बदल देता है

सादगी जामा-ए-ग़ालिब है ब-ज़ाहिर लेकिन
रूह में अपनी इसे 'मीर' बदल देता है

मुड़ के देखा तो सर-ए-बाम वो जलता मंज़र
मेरा इक लम्हा-ए-ताख़ीर बदल देता है

'औन' इस दौर का राँझा है 'अजब सहल-मिज़ाज
ख़ौफ़-ए-रुस्वाई से जो हीर बदल देता है