उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghubar ban ke uTha dil mein raushni ka tilism

ग़ुबार बन के उठा दिल में रौशनी का तिलिस्म

غبار بن کے اٹھا دل میں روشنی کا طلسم

शायर: Oan Raza6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़ुबार बन के उठा दिल में रौशनी का तिलिस्म
ये किस मक़ाम पे लाया तिरी गली का तिलिस्म

अब आए भी तो 'अबस है पयाम-ए-बेख़बरी
हुदूद दे भी चुका हम को आगही का तिलिस्म

असीर-ए-दर-बदरी हूँ सो मेरे साथ न चल
तुझे भी ख़ाक न कर दे ये बे-घरी का तिलिस्म

जहाज़-रान ने दिल से गिरा दिए लंगर
चमक रहा था तह-ए-आब जल-परी का तिलिस्म

हदफ़ हुआ था मिरा क़ाफ़िले का पहला फ़र्द
कि जब हवास पे छाया था आख़री का तिलिस्म

पुरानी खाल उतारेगा 'औन' वक़्त का साँप
हर एक पल में सिमट आएगा सदी का तिलिस्म