उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har guzarta shaKHs gham-aluda hai

हर गुज़रता शख़्स ग़म-आलूदा है

ہر گزرتا شخص غم آلودہ ہے

शायर: Oan Raza7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर गुज़रता शख़्स ग़म-आलूदा है
वो गली कितनी सितम-आलूदा है

लुत्फ़-ए-यकताई है शब भर और फिर
साए से अपने सनम आलूदा है

सब्त है माथे पे ज़ख़्म-ए-आरज़ू
अंधे सज्दों से हरम आलूदा है

क्या उठाएँ कच्ची उम्मीदों पे घर
हुस्न की दीवार नम-आलूदा है

आँख में ऐसा चुभा मंज़र कोई
आज तक आहू ये रम-आलूदा है

कौन आगे कौन पीछे रह गया
वसवसों में हर क़दम आलूदा है

कातिब-ए-तहरीर-ए-हक़ कैसा है 'औन'
ख़ून से जिस का क़लम आलूदा है