उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baadal wo inqilab ka barsa hai mere baad

बादल वो इंक़िलाब का बरसा है मेरे बा'द

بادل وہ انقلاب کا برسا ہے میرے بعد

शायर: Oan Raza7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बादल वो इंक़िलाब का बरसा है मेरे बा'द
सहरा सभी के ख़्वाब में दरिया है मेरे बा'द

दाएम ये मेरी फ़त्ह का ए'लान ही तो है
नस्ल-ए-'अदू को मेरा ही धड़का है मेरे बा'द

निकली सुपुर्दगी के कुएँ से कोई सुरंग
भटके हुओं ने रास्ता पाया है मेरे बा'द

हर ताक़ पर दिया नहीं जलता ओ अजनबी
ख़ुद को सँभालना कि अँधेरा है मेरे बा'द

मैं था जो उस बहार के रस्ते का ख़ार था
नथली का फूल अब तो सितारा है मेरे बा'द

वो क्या उठा सकेगा तिरे आबलों का वज़्न
सहरा तो अपनी ख़ाक उड़ाता है मेरे बा'द

ऐ 'औन' मेरे प्रेम की माला थी जिस के नाम
मोती वफ़ा के ढूँडता फिरता है मेरे बा'द