उर्दू शायरी · ग़ज़ल

parinde uske liye hain rasul us ka hai

परिंदे उस के लिए हैं रसूल उस का है

پرندے اس کے لیے ہیں رسول اس کا ہے

शायर: Saba Tabish7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

परिंदे उस के लिए हैं रसूल उस का है
हमारी बात में हर दम शुमूल उस का है

अलम को चूम के पढ़ते हैं मद्ह-ए-रब्ब-ए-अली
कि सब से पहले तो इब्नुल-बतूल उस का है

ग़ज़ल के जितने वसीले हैं सारे उस के हैं
मफ़ाअलात है उस का फ़ऊल उस का है

यहाँ के रस्म-ओ-रिवाज अब नहीं मिरे बस के
मैं चल रही हूँ लगन से उसूल उस का है

हसीन वो है सो दुनिया उसे हसीन कहे
क़रीब वो है सो क़ुर्बत का फूल उस का है

मिरा ये हक़ है कि मैं उस पे ए'तिबार करूँ
मुनाफ़िक़त है कि हल्फ़-उल-फ़ुज़ूल उस का है

'सबा' चली तो उड़े पंछियों के होश-ओ-हवास
कि राह-ए-बहर में सहरा बबूल उस का है