उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aisa nahin tha asl mein jaisa bana liya

ऐसा नहीं था अस्ल में जैसा बना लिया

ایسا نہیں تھا اصل میں جیسا بنا لیا

शायर: Saba Tabish9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ऐसा नहीं था अस्ल में जैसा बना लिया
दिल ने किसी की याद का चेहरा बना लिया

पहली नशिस्त आब्ला-पाओं में मेरी है
मजनूँ को मैं ने दश्त में चेला बना लिया

खींची है अपने ख़ून से नक़्शे पे इक लकीर
जंगल में अपनी मर्ज़ी का रस्ता बना लिया

मेरे लिए तो इन में कोई फ़र्क़ है नहीं
जब चाहा अपनी बेटी को बेटा बना लिया

महरूम यूँ हुई हूँ मैं उस दर के सामने
मकड़ी ने मेरे होंटों पे जाला बना लिया

उन में कशिश अजीब थी दरिया-दिली के साथ
लोगों ने दश्त-ज़ादों को आक़ा बना लिया

चमका था एक जुगनू मिरे दिल के आस-पास
अब जिस को सब ने आँख का तारा बना लिया

घर में जगह है उस की न है घाट में जगह
क़िस्मत को हम ने धोबी का कुत्ता बना लिया

हम ने वहाँ फ़रोख़्त की थी वहशतें 'सबा'
दुनिया ने जिस दुकान में खाता बना लिया