उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jaise hon naqab-kari ke aalat mere hath

जैसे हों नक़ब-कारी के आलात मिरे हाथ

جیسے ہوں نقب کاری کے آلات مرے ہاتھ

शायर: Saba Tabish6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जैसे हों नक़ब-कारी के आलात मिरे हाथ
दस्तक से उलझते रहे कल रात मिरे हाथ

क़दमों से लिपट जाए फ़ुरात आज भी मेरे
दजला के किनारों से करें बात मिरे हाथ

मौसीक़ी-ए-बाराँ हो कि हो बात तुम्हारी
लिखते हैं बड़े शौक़ से नग़्मात मिरे हाथ

है जिस का फ़ुसूँ दहर की हर शय में नुमायाँ
उस के भी रक़म करते हैं जज़्बात मिरे हाथ

करती रहें अब्बास का गिर्या मिरी आँखें
लिखते रहें ज़ैनब की फ़ुतूहात मिरे हाथ

हैं पाक सभी आल-ए-नबी रिज्स से 'ताबिश'
ततहीर से आया है ये इसबात मिरे हाथ