उर्दू शायरी · ग़ज़ल

muntazir hai tabhi dawam mera

मुंतज़िर है तभी दवाम मिरा

منتظر ہے تبھی دوام مرا

शायर: Saba Tabish6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुंतज़िर है तभी दवाम मिरा
आगही से भरा है जाम मिरा

ख़ुद-बख़ुद जा के ज़ख़्म खा आऊँ
कौन लेता है इंतिक़ाम मिरा

राम अब तक मुझे पुकारता है
गोपियाँ सुन रही हैं नाम मिरा

मेरे घाव पे है नमक मौजूद
तुझ से अच्छा है एहतिमाम मिरा

निस्बत-ए-शे'र मुझ को हासिल है
लोग करते हैं एहतिराम मिरा

मुझ से गोयाई रब ने छीनी है
ख़ामुशी जैसा है कलाम मिरा