उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baDh gai hain qurbaten bhi faslon ke sath sath

बढ़ गई हैं क़ुर्बतें भी फ़ासलों के साथ साथ

بڑھ گئی ہیں قربتیں بھی فاصلوں کے ساتھ ساتھ

शायर: Saba Tabish6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बढ़ गई हैं क़ुर्बतें भी फ़ासलों के साथ साथ
और मोहब्बत बढ़ रही है क़ुर्बतों के साथ साथ

हम जो थे महव-ए-सफ़र यक-लख़्त तन्हा हो गए
खो गई मंज़िल हमारी रास्तों के साथ साथ

जो मोहब्बत के अमीं थे किस तरफ़ को चल दिए
बंद दरवाज़ा पड़ा है खिड़कियों के साथ साथ

चाय का कप हाथ में था और ग़ज़ल जारी रही
फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन की धुनों के साथ साथ

मैं सड़क पर चल रही हूँ थाम कर उस का ख़याल
एक सहरा चल रहा है पानियों के साथ साथ

क़हक़हे तन्हाई दहशत में मिरी तारीकियाँ
रात काटी जा रही है रतजगों के साथ साथ