उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek to bebasi izafi hai

एक तो बेबसी इज़ाफ़ी है

ایک تو بے بسی اضافی ہے

शायर: Saba Tabish6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक तो बेबसी इज़ाफ़ी है
और फिर ज़िंदगी इज़ाफ़ी है

आँख में आँसुओं ने बैन किया
या'नी मेरी हँसी इज़ाफ़ी है

ये ख़ुशी मुस्कुराहटें रौनक़
इन दिनों ये सभी इज़ाफ़ी है

यार ये क्या कि तेरे होते हुए
मुझ में तेरी कमी इज़ाफ़ी है

दर्द अज्दाद से मिला है कुछ
और फिर शा'इरी इज़ाफ़ी है

भूल बैठे तुझे 'सबा' अहबाब
तू उन्हें वाक़'ई इज़ाफ़ी है