उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pahaDon ko jhinjhoDa ja raha hai

पहाड़ों को झिंझोड़ा जा रहा है

پہاڑوں کو جھنجھوڑا جا رہا ہے

शायर: Chandrakant Rawat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पहाड़ों को झिंझोड़ा जा रहा है
बड़ी सड़कों से जोड़ा जा रहा है

हवा में पुल बनाए जा रहे हैं
दिशाओं को मरोड़ा जा रहा है

नई तरकीब ये सोची गई है
नदी के रुख़ को मोड़ा जा रहा है

सुरंगें क्या बिछाई जा रही हैं
कि सर पत्थर पे फोड़ा जा रहा है

गगनचुंबी 'इमारत बन रही है
पुराने घर को तोड़ा जा रहा है

खदानें खानें खोदी जा रही हैं
कि धरती को निचोड़ा जा रहा है