उर्दू शायरी · ग़ज़ल

niyaz-o-naz ka ye silsila nahin jata

नियाज़-ओ-नाज़ का ये सिलसिला नहीं जाता

نیاز و ناز کا یہ سلسلہ نہیں جاتا

शायर: Aal-e-Raza Raza7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नियाज़-ओ-नाज़ का ये सिलसिला नहीं जाता
जफ़ा को छेड़ के शौक़-ए-वफ़ा नहीं जाता

खटक रही हैं जो रग रग में पैरती फाँसें
किसी से एक ठिकाने रहा नहीं जाता

जो आप वज्ह न पूछें तो एक बात कहूँ
बग़ैर आप के मुझ से जिया नहीं जाता

ख़ता मुआ'फ़ बहुत दे दिया तुम्हारा साथ
अब अपने हाल पे मुझ से हँसा नहीं जाता

ये और बात है जब भी उठा दिए जाएँ
तुम्हारी बज़्म से लेकिन उठा नहीं जाता

अजीब तीर कलेजे पे खाए बैठा हूँ
अजीब ज़ख़्म कि जिस का मज़ा नहीं जाता

जहाँ बनाते हों क़िस्मत मिटा के ख़ुद्दारी
ज़माना जाए तो जाए 'रज़ा' नहीं जाता