उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nikle hain dil KHaridne lal-o-guhar se aap

निकले हैं दिल ख़रीदने ला'ल-ओ-गुहर से आप

نکلے ہیں دل خریدنے لعل و گہر سے آپ

शायर: Zafar Mirzapuri8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

निकले हैं दिल ख़रीदने ला'ल-ओ-गुहर से आप
बेगाना किस क़दर हैं ख़ुलूस-ए-बशर से आप

हँसते हैं इस लिए मिरे हाल-ए-तबाह पर
वाक़िफ़ नहीं हैं लज़्ज़त-ए-दर्द-ए-जिगर से आप

मुझ से न पूछिए मिरा अफ़्साना-ए-हयात
ये राज़ पूछ लीजे मिरी चश्म-ए-तर से आप

आँखों में बरहमी है तबस्सुम लबों पे है
कितने दिलों को लूट चुके इस हुनर से आप

मौजों में बढ़ रही है मिरी कश्ती-ए-हयात
साहिल पे छुप के बैठे हैं तूफ़ाँ के डर से आप

मंज़िल थी ठोकरों में जवाँ थे जब हौसले
अब थक के बैठ जाते हैं नाम-ए-सफ़र से आप

तीरा-शबी के आख़री लम्हात हैं क़रीब
मायूस क्यूँ हैं इतने तुलू'-ए-सहर से आप

टूटा हुआ जो दिल है तो फूटा हुआ नसीब
पूछें न कुछ मआल-ए-तमन्ना 'ज़फ़र' से आप