उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nind nagri mein phir ujala hai

नींद नगरी में फिर उजाला है

نیند نگری میں پھر اجالا ہے

शायर: Vikram5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नींद नगरी में फिर उजाला है
ख़्वाब-मेहमान आने वाला है

दिन पे छींटें पड़ी हैं ख़्वाबों की
कितना कम-ज़र्फ़ शब-पियाला है

बस मोहब्बत में लड़खड़ाए हैं
और सब ठीक से सँभाला है

हम को बस एक काम था मरना
वो भी हम ने ख़ुदा पे टाला है

मुझ में बिल्कुल नहीं बचा हूँ मैं
इश्क़ ने इस तरह खंगाला है