उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nind ki surmai tahrir se ukta gae hain

नींद की सुरमई तहरीर से उक्ता गए हैं

نیند کی سرمئی تحریر سے اکتا گئے ہیں

शायर: Vikas Sharma Raaz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नींद की सुरमई तहरीर से उक्ता गए हैं
ख़्वाब से ख़्वाब की ता'बीर से उक्ता गए हैं

पर ज़बाँ है कि लहू चाट रही है अब भी
सर से नेज़े तो कमाँ तीर से उक्ता गए हैं

एक ही लय में खनकती है सदा करती है
हम तो अब पाँव की ज़ंजीर से उक्ता गए हैं

तीसरा जाम है ये हिज्र का पर ज़िंदा हैं
हम तो इस ज़ह्र की तासीर से उक्ता गए हैं

आप को मीर-तक़ी-'मीर' को पढ़ना होगा
आप अगर ज़ुल्फ़-ए-गिरह-गीर से उक्ता गए हैं