उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nigahon mein ajab si bebasi hai

निगाहों में 'अजब सी बेबसी है

نگاہوں میں عجب سی بے بسی ہے

शायर: Lokesh Tripathi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

निगाहों में 'अजब सी बेबसी है
ख़ुशी में भी नहीं मिलती ख़ुशी है

नहीं है और लत कोई भी मुझ में
बस उस को देखने की लत लगी है

निशानी सब मिटा डाली है मैं ने
जलाना एक ख़त बस आख़िरी है

मोहब्बत और सियासत साथ में हैं
नए युग की नई जादूगरी है

यक़ीं मुझ को मुक़द्दर पर है पूरा
जो होना है यहाँ होता वही है