उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nazar aane lage ho mehrban se

नज़र आने लगे हो मेहरबाँ से

نظر آنے لگے ہو مہرباں سے

शायर: Sabir Abuhari8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नज़र आने लगे हो मेहरबाँ से
ये अंदाज़ आ गए तुम में कहाँ से

किसे रास आएगी तेरी ख़ुदाई
अगर हम उठ गए बज़्म-ए-जहाँ से

भरम खुल जाएगा तेरे करम का
अगर कुछ कह दिया हम ने ज़बाँ से

कहाँ से आ गया ये अब्र-ए-रहमत
हमें कुछ काम था बर्क़-ए-तपाँ से

जिसे देखो वही मतलब का बंदा
मोहब्बत उठ गई रू-ए-जहाँ से

करेंगे ज़िक्र तेरे हुस्न का भी
अगर फ़ुर्सत मिली कार-ए-जहाँ से

तड़पती फिर रही है बर्क़ अब तक
उलझ बैठी थी मेरे आशियाँ से

यूँही रोती नहीं 'साबिर' को दुनिया
उसे भी इश्क़ था अहल-ए-जहाँ से