उर्दू शायरी · ग़ज़ल

naya ek dukh mayassar ho gaya hai

नया इक दुख मयस्सर हो गया है

نیا اک دکھ میسر ہو گیا ہے

शायर: Vikas Sharma Raaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नया इक दुख मयस्सर हो गया है
हमें वो ख़्वाब अज़्बर हो गया है

बिछड़ने का हमें अंदेशा तो था
मगर अब दिन मुक़र्रर हो गया है

असर है ये हमारी दस्तकों का
जहाँ दीवार थी दर हो गया है

यहाँ महफ़ूज़ हैं तूफ़ान से हम
मगर जो शख़्स बे-घर हो गया है

बहुत ख़ुश हूँ उसे बेचैन कर के
हिसाब उस से बराबर हो गया है

ख़बर भी है दिल-ए-सर-सब्ज़ तुझ को
दरून-ए-ज़ात बंजर हो गया है