उर्दू शायरी · ग़ज़ल

naqab uDa to mujhe surKH lab dikhai diye

नक़ाब उड़ा तो मुझे सुर्ख़ लब दिखाई दिए

نقاب اڑا تو مجھے سرخ لب دکھائی دئے

शायर: Umair Najmi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नक़ाब उड़ा तो मुझे सुर्ख़ लब दिखाई दिए
वो दो दिए जो हवा के सबब दिखाई दिए

मैं जुज़्वी अंधा था दो-चार रंग दिखते थे
मगर जब उस ने कहा देख सब दिखाई दिए

उसी के बाग़ में आने का वक़्त होगा तभी
तमाम फूल बहुत बा-अदब दिखाई दिए

नज़र झुकी ही नहीं उस से क़ब्ल हैरत है
किसी के पाँव बिछड़ने की शब दिखाई दिए

ख़ला में घूरूँ तो जो चेहरे बनने लगते हैं
पता नहीं वो कहाँ और कब दिखाई दिए

दबे हुए थे कई ख़्वाब आँसुओं के तले
मैं रो के सोया जब इक शाम तब दिखाई दिए

ग़लत समझता रहा दोस्तों को अब समझा
नज़र तो आते थे पहले पर अब दिखाई दिए

ये किन उजाड़ जज़ीरों की सम्त आ गया हूँ
मुझे लगा था किनारे हैं जब दिखाई दिए