उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nairangi-e-wahshat ki dhanak dekh rahe hain

नैरंगी-ए-वहशत की धनक देख रहे हैं

نیرنگیٔ وحشت کی دھنک دیکھ رہے ہیں

शायर: Jaani Lakhnavi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नैरंगी-ए-वहशत की धनक देख रहे हैं
टूटे हुए तारे की चमक देख रहे हैं

इस आइना-ख़ाना-नुमा आलम से निकल कर
कुछ लोग पस-ए-बाम-ए-फ़लक देख रहे हैं

दिल-गलियों में बैठे हुए ख़्वाबीदा मुसाफ़िर
इस शहर-ए-तमन्ना की सड़क देख रहे हैं

गिनवाएँगे बुनियाद की कमियाँ भी अभी हम
दीवारों पे मनक़ूश दरक देख रहे हैं

इक बूद को फिर हस्त बनाने पे तुला है
हैरत से हम इस दिल की सनक देख रहे हैं

दुनिया ने जिसे क़ब्र कहा है हम उसी में
इक हुस्न-ए-मुजस्सम की झलक देख रहे हैं

हम गोश-बर-आवाज़-ए-अदम लोग हैं 'जानी'
आवाज़-ए-ख़मोशी की खनक देख रहे हैं