उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nahin ki teri mohabbat mein ghar se nikle the

नहीं कि तेरी मोहब्बत में घर से निकले थे

نہیں کہ تیری محبت میں گھر سے نکلے تھے

शायर: Aarib Hashmi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नहीं कि तेरी मोहब्बत में घर से निकले थे
हम अपने आप से वहशत में घर से निकले थे

इक एक कर के सभी रास्ते में मारे गए
जो लोग तेरी हिफ़ाज़त में घर से निकले थे

हमारी बे-सर-ओ-सामानी ये बताती है
हम ऐसे लोग तो उजलत में घर से निकले थे

तमाम ख़्वाब थे बिखरे हमारे बिस्तर पर
बदन समेट के वहशत में घर से निकले थे