उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nahin hai wajh zaruri ki jab ho tab mar jaen

नहीं है वज्ह ज़रूरी कि जब हो तब मर जाएँ

نہیں ہے وجہ ضروری کہ جب ہو تب مر جائیں

शायर: Umair Najmi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नहीं है वज्ह ज़रूरी कि जब हो तब मर जाएँ
उदास लोग हैं मुमकिन है बे-सबब मर जाएँ

हमारी नींद का दौरानिया है रोज़-अफ़्ज़ूँ
कोई ब'ईद नहीं है कि एक शब मर जाएँ

ये मरने वालों को रोने का सिलसिला न रहे
कुछ ऐसा हो कि ब-यक-वक़्त सब के सब मर जाएँ

ये अहल-ए-हिज्र शिफ़ायाब तो नहीं होंगे
कोई दवा हो कि जिस से ये जाँ-ब-लब मर जाएँ

हमारी नब्ज़ समझ ले हमारे हाथ में है
तू सिर्फ़ हुक्म दे बस दिन बता कि कब मर जाएँ

ये मोतिया तो नहीं है सफ़ेद लाशें हैं
उभर के सत्ह पे आते हैं ख़्वाब जब मर जाएँ

न कोई रोकने वाला न दरिया दूर मगर
सुना है प्यास से मरना है मुस्तहब मर जाएँ

यक़ीन कर कि कई बार एक दिन में 'उमैर'
हम अपने-आप से कहते हैं यार अब मर जाएँ