उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nahin chaha tha ye kya ho gaya hai

नहीं चाहा था ये क्या हो गया है

نہیں چاہا تھا یہ کیا ہو گیا ہے

शायर: Aarib Hashmi10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नहीं चाहा था ये क्या हो गया है
उसे मुझ पर भरोसा हो गया है

ये इक दूजे का दुख भी बाँटते नईं
मेरे लोगों को ये क्या हो गया है

बुझा दो ताक़ में जलते दियों को
इधर देखो उजाला हो गया है

मयस्सर है सभी को तेरी क़ुर्बत
तो क्या तू इतना सस्ता हो गया है

बुरा कहती थी जिस को सारी दुनिया
कहा तुम ने तो अच्छा हो गया है

उठी जो आँख मंज़िल सामने थी
धरा पाओं तो रस्ता हो गया है

फ़लक को छू के लौट आईं दुआएँ
ये मेरे साथ धोका हो गया है

उधर निकला वो मश्कीज़ा उठा कर
इधर हर शख़्स प्यासा हो गया है

तिरे बिन भी गुज़ारा ज़िंदगी को
सितम ये है गुज़ारा हो गया है

मुझे उस की ख़बर कैसे हो 'आरिब'
मिले जो एक अर्सा हो गया है