उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nafas nafas mein nihan iztirab hota hai

नफ़स नफ़स में निहाँ इज़्तिराब होता है

نفس نفس میں نہاں اضطراب ہوتا ہے

शायर: D. Raj Kanwal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नफ़स नफ़स में निहाँ इज़्तिराब होता है
बला की चीज़ ये दौर-ए-शबाब होता है

है दफ़्न इस में हर इक ज़िंदगी का अफ़्साना
हर एक चेहरा मुकम्मल किताब होता है

किसी की याद में गुज़रा हुआ हर इक लम्हा
बहुत हसीन बहुत लाजवाब होता है

किसी का नाम बदलने से कुछ नहीं होता
गुल-ए-गुलाब हमेशा गुलाब होता है

वफ़ा में जान भी जाए तो ग़म न कर ऐ दिल
वफ़ा की राह में मिटना सवाब होता है

मिरे सलाम-ए-मोहब्बत पे आप चुप क्यों हैं
हर इक सवाल का कुछ तो जवाब होता है

जिन्हें नसीब हुई है 'कँवल' शब-ए-हिज्राँ
उन्हें ख़बर है कि क्या इज़्तिराब होता है