उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chhoD kar jannat jidhar bhi hazrat-e-adam gae

छोड़ कर जन्नत जिधर भी हज़रत-ए-आदम गए

چھوڑ کر جنت جدھر بھی حضرت آدم گئے

शायर: D. Raj Kanwal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

छोड़ कर जन्नत जिधर भी हज़रत-ए-आदम गए
साथ साथ उन के हज़ारों कारवान-ए-ग़म गए

रफ़्ता-रफ़्ता जब मिरी आँखों पर आँसू जम गए
यूँ लगा जैसे मुसाफ़िर मंज़िलों पर थम गए

बे-सबाती पर तू जिन के रात भर गिर्यां रही
फूल कब के वो चमन से देख ऐ शबनम गए

मै-कदा वीरान साग़र सर-निगूँ साक़ी उदास
ज़िंदगी से अब सुरूर-ओ-कैफ़ के 'आलम गए

अगले वक़्तों की कहाँ अब रह गईं बातें हुज़ूर
हुस्न की सादा-मिज़ाजी 'इश्क़ के दम-ख़म गए

अंजुमन की अंजुमन तस्वीर बन कर रह गई
इस अदा से आज उन की अंजुमन में हम गए

रह गई अब चिलचिलाती धूप नफ़रत की 'कँवल'
चाँदनी रातें गईं वो प्यार के मौसम गए