उर्दू शायरी · ग़ज़ल

barha jazbaat ki maujon mein bah jate hain log

बारहा जज़्बात की मौजों में बह जाते हैं लोग

بارہا جذبات کی موجوں میں بہہ جاتے ہیں لوگ

शायर: D. Raj Kanwal5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बारहा जज़्बात की मौजों में बह जाते हैं लोग
चोट कितनी भी कड़ी हो दिल पे सह जाते हैं लोग

मंज़िलों का 'उम्र भर मिलता नहीं उन को निशाँ
कारवाँ से इस क़दर पीछे भी रह जाते हैं लोग

वक़्त से टकरा के ज़िंदा रह नहीं सकता कोई
वक़्त की आँखों से आँसू बन के बह जाते हैं लोग

इक मो'अम्मा ही रहा ये अहल-ए-दुनिया के लिए
छोड़ कर दुनिया को आख़िर किस जगह जाते हैं लोग

हम नहीं करते गिला शिकवा किसी से ऐ 'कँवल'
घूम-फिर कर बात लेकिन दिल की कह जाते हैं लोग