उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chhiTke hain tirgi mein sitare kabhi kabhi

छिटके हैं तीरगी में सितारे कभी कभी

چھٹکے ہیں تیرگی میں ستارے کبھی کبھی

शायर: D. Raj Kanwal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

छिटके हैं तीरगी में सितारे कभी कभी
काम आ गए हैं ग़म के शरारे कभी कभी

तूफ़ान बन गए हैं कभी मेरे वास्ते
मौजों में मिल गए हैं किनारे कभी कभी

अपनों की बे-रुख़ी से तग़य्युर के ख़ौफ़ से
बेगाने बन गए हैं हमारे कभी कभी

ऐ दोस्त तुम से तर्क-ए-त'अल्लुक़ के बावजूद
ख़्वाबों में खो गए हैं तुम्हारे कभी कभी

बे-ख़ौफ़ हम क़ज़ा की हदों से गुज़र गए
करती रही हयात इशारे कभी कभी

रोते रहे हैं यास के मारे तमाम रात
दिन इस तरह भी हम ने गुज़ारे कभी कभी

तन्हा-रवी की ख़ैर मोहब्बत में ऐ 'कँवल'
ठुकरा दिए हैं हम ने सहारे कभी कभी