उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aankhon se ho ke dil mein wo surat utar gai

आँखों से हो के दिल में वो सूरत उतर गई

آنکھوں سے ہو کے دل میں وہ صورت اتر گئی

शायर: D. Raj Kanwal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आँखों से हो के दिल में वो सूरत उतर गई
मुमकिन न थी जो बात वही बात कर गई

क्या जाने क्या वो ग़म था जो हर दिल को छू गया
जो आँख भी गई तिरी महफ़िल से तर गई

मेरा ही आशियाँ था गिरीं जिस पे बिजलियाँ
मेरी ही ख़ाक थी जो हवा में बिखर गई

टिकती न थी किसी पे ज़माने में आज तक
देखा तुम्हें तो फिर न किसी पर नज़र गई

जाते हुए जहाँ से यही सोचते हैं लोग
हाए वो ज़िंदगी वो जवानी किधर गई

दामन छुड़ा के आप चले तो गए मगर
हम क्या कहें जो दिल पे हमारे गुज़र गई

रोए शब-ए-फ़िराक़ हम इतना कि ऐ 'कँवल'
दामन निचोड़ती हुई अपना सहर गई