उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aankhon se koi mere kahin KHwab le gaya

आँखों से कोई मेरे कहीं ख़्वाब ले गया

آنکھوں سے کوئی میرے کہیں خواب لے گیا

शायर: D. Raj Kanwal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आँखों से कोई मेरे कहीं ख़्वाब ले गया
या'नी तमाम हल्क़ा-ए-अहबाब ले गया

छेड़ा ही था सितार पे इक नग़्मा-ए-हयात
हाथों से वक़्त छीन के मिज़राब ले गया

आँसू की एक बूँद कलेजा निगल गई
पत्थर को एक क़तरा-ए-सीमाब ले गया

दिल की किताब लूटने वाला भी ख़ूब था
दिलचस्प जो था सब से वही बाब ले गया

जल-बुझ के रह गया है हर इक याद का चराग़
चुन चुन के वक़्त गौहर-ए-नायाब ले गया

हर गाम पर लगी थी यहाँ रहज़नों की भीड़
जिस के लगा जो हाथ वो अस्बाब ले गया

क़ातिल के रूप में वो कशिश थी कि ऐ 'कँवल'
मक़्तल में मुझ को फिर दिल-ए-बे-ताब ले गया