उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nae suKHan ki mashaqqat mein KHarch hota hai

नए सुख़न की मशक़्क़त में ख़र्च होता है

نئے سخن کی مشقت میں خرچ ہوتا ہے

शायर: Balwan Singh Azar4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नए सुख़न की मशक़्क़त में ख़र्च होता है
मिरा वुजूद मोहब्बत में ख़र्च होता है

नहीं लुभाता मुझे कोई 'आम सा मंज़र
जुनून आँख की हैरत में ख़र्च होता है

ख़ुदा ऐ काश कोई और काम भी देता
ये शहर सिर्फ़ 'इबादत में ख़र्च होता है

सिसकते रहते हैं फ़ुर्सत के रात दिन 'आज़र'
जिसे भी देखिए 'उजलत में ख़र्च होता है