उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na-rawa kahiye na-saza kahiye

ना-रवा कहिए ना-सज़ा कहिए

ناروا کہئے ناسزا کہئے

शायर: Dagh Dehlvi18 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस शीर्षक की यह संग्रह प्रविष्टि 2 है। समान शीर्षक के रिकॉर्ड में पाठ या श्रेय का अंतर है; इसे स्वतंत्र आधिकारिक संस्करण का दावा न मानें। अन्य संग्रह प्रविष्टि 1

ना-रवा कहिए ना-सज़ा कहिए
कहिए कहिए मुझे बुरा कहिए

तुझ को बद-अहद ओ बेवफ़ा कहिए
ऐसे झूटे को और क्या कहिए

दर्द दिल का न कहिए या कहिए
जब वो पूछे मिज़ाज क्या कहिए

फिर न रुकिए जो मुद्दआ कहिए
एक के बा'द दूसरा कहिए

आप अब मेरा मुँह न खुलवाएँ
ये न कहिए कि मुद्दआ कहिए

वो मुझे क़त्ल कर के कहते हैं
मानता ही न था ये क्या कहिए

दिल में रखने की बात है ग़म-ए-इश्क़
इस को हरगिज़ न बरमला कहिए

तुझ को अच्छा कहा है किस किस ने
कहने वालों को और क्या कहिए

वो भी सुन लेंगे ये कभी न कभी
हाल-ए-दिल सब से जा-ब-जा कहिए

मुझ को कहिए बुरा न ग़ैर के साथ
जो हो कहना जुदा जुदा कहिए

इंतिहा इश्क़ की ख़ुदा जाने
दम-ए-आख़िर को इब्तिदा कहिए

मेरे मतलब से क्या ग़रज़ मतलब
आप अपना तो मुद्दआ कहिए

ऐसी कश्ती का डूबना अच्छा
कि जो दुश्मन को नाख़ुदा कहिए

सब्र फ़ुर्क़त में आ ही जाता है
पर उसे देर-आश्ना कहिए

आ गई आप को मसीहाई
मरने वालों को मर्हबा कहिए

आप का ख़ैर-ख़्वाह मेरे सिवा
है कोई और दूसरा कहिए

हाथ रख कर वो अपने कानों पर
मुझ से कहते हैं माजरा कहिए

होश जाते रहे रक़ीबों के
'दाग़' को और बा-वफ़ा कहिए