उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na taDap tu zer-e-KHanjar dil-e-be-qarar so ja

न तड़प तू ज़ेर-ए-ख़ंजर दिल-ए-बे-क़रार सो जा

نہ تڑپ تو زیر خنجر دل بے قرار سو جا

शायर: Ufuq Lakhnavi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न तड़प तू ज़ेर-ए-ख़ंजर दिल-ए-बे-क़रार सो जा
जो यहाँ ना नींद आए तो तह-ए-मज़ार सो जा

शब-ए-वस्ल वो झिजक थी कि न आई नींद उस को
मैं कहा किया बराबर कि ज़रा तो यार सो जा

अरे मस्त-ए-ख़्वाब-ए-ग़फ़लत ये वो ख़्वाब-गह है दुनिया
न खुलें दुबारा आँखें अगर एक बार सो जा

अगर ऐ 'उफ़ुक़' वो महवश नहीं जागता जगाए
तो चिमट के उस से तू भी उसे कर के प्यार सो जा